कक्षा 9 गणित — संपूर्ण सूत्र संग्रह एवं विस्तृत अवधारणाएँ
यह अध्ययन सामग्री कक्षा 9 गणित (NCERT व CBSE पाठ्यक्रम) के सभी 11 अध्यायों के महत्वपूर्ण सूत्रों, परिभाषाओं, बीजीय सर्वसमिकाओं, ज्यामितीय नियमों, पाईथागोरस प्रमेयों, त्रिकोणमितीय सारणी, चरणबद्ध हल किए गए उदाहरणों तथा एनिमेटेड दृश्य (SVG) चित्रों का एक संपूर्ण प्रामाणिक संग्रह है।
1. संख्या पद्धति (Number System) — संपूर्ण 16 बिंदु
गणित में, संख्या पद्धति (Number System) संख्याओं को व्यक्त करने, वर्गीकृत करने और उनका प्रयोग गणितीय संक्रियाओं में करने की एक व्यवस्थित प्रणाली है। नीचे इस अध्याय के संपूर्ण 16 मूलभूत बिंदुओं का विस्तृत विवरण दिया गया है:
एनिमेटेड रेखाचित्र: वास्तविक संख्याओं का वर्गीकरण (Real Numbers Hierarchy)
1.1 प्राकृतिक संख्याएँ (Natural Numbers - \(N\))
परिभाषा: वे संख्याएँ जिनका उपयोग वस्तुओं की गिनती करने के लिए किया जाता है और जो 1 से प्रारम्भ होकर अनंत (\(\infty\)) तक जाती हैं।
समुच्चय रूप: \(N = \{1, 2, 3, 4, 5, \dots\}\)
विशेषता: सबसे छोटी प्राकृतिक संख्या 1 है। इनमें शून्य (0) तथा ऋणात्मक संख्याएँ शामिल नहीं होतीं।
1.2 पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers - \(W\))
परिभाषा: यदि प्राकृतिक संख्याओं के संग्रह में शून्य (0) को भी शामिल कर लिया जाए, तो प्राप्त संख्याओं का संग्रह पूर्ण संख्याएँ कहलाता है।
समुच्चय रूप: \(W = \{0, 1, 2, 3, 4, \dots\}\)
विशेषता: सभी प्राकृतिक संख्याएँ पूर्ण संख्याएँ होती हैं (\(N \subset W\)), परन्तु 0 एक ऐसी पूर्ण संख्या है जो प्राकृतिक संख्या नहीं है।
1.3 पूर्णांक (Integers - \(Z\))
परिभाषा: सभी पूर्ण संख्याओं तथा प्राकृतिक संख्याओं के ऋणात्मक मानों के सम्मिलित संग्रह को पूर्णांक कहते हैं।
समुच्चय रूप: \(Z = \{\dots, -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, \dots\}\)
- धन पूर्णांक (\(Z^+\)): \(1, 2, 3, 4, \dots\)
- ऋण पूर्णांक (\(Z^-\)): \(-1, -2, -3, -4, \dots\)
- शून्य (0): यह न तो धन पूर्णांक है और न ही ऋण पूर्णांक।
1.4 परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers - \(Q\))
परिभाषा: वे सभी संख्याएँ जिन्हें \(\frac{p}{q}\) के रूप में निरूपित किया जा सकता है, जहाँ \(p\) और \(q\) पूर्णांक हैं तथा \(q \neq 0\) है।
उदाहरण: \(\frac{1}{2}, \frac{3}{4}, -\frac{2}{5}, 5 = \frac{5}{1}, 0 = \frac{0}{1}\)
दशमलव प्रसार: परिमेय संख्याओं का दशमलव प्रसार या तो शांत (Terminating) होता है अथवा अशांत आवर्ती (Non-terminating Recurring) होता है।
1.5 अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers - \(Q'\))
परिभाषा: वे संख्याएँ जिन्हें \(\frac{p}{q}\) (जहाँ \(p, q \in Z, q \neq 0\)) के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
उदाहरण: \(\sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{5}, \pi, 0.1010010001\dots\)
दशमलव प्रसार: इनका दशमलव प्रसार अशांत अनावर्ती (Non-terminating Non-repeating) होता है।
1.6 वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers - \(R\))
परिभाषा: परिमेय संख्याओं (\(Q\)) और अपरिमेय संख्याओं (\(Q'\)) के सम्मिलित संग्रह को वास्तविक संख्याएँ कहते हैं।
समीकरण: \(R = Q \cup Q'\)
विशेषता: प्रत्येक वास्तविक संख्या को संख्या रेखा (Number Line) पर एक अद्वितीय बिंदु द्वारा दर्शाया जा सकता है, तथा संख्या रेखा का प्रत्येक बिंदु एक अद्वितीय वास्तविक संख्या को निरूपित करता है।
1.7 दशमलव प्रसार एवं उनके प्रकार (Types of Decimal Expansions)
- 1. शांत दशमलव (Terminating Decimal): भाग देने पर शेषफल शून्य प्राप्त हो जाता है। उदाहरण: \(\frac{1}{2} = 0.5\), \(\frac{7}{8} = 0.875\)। (यदि हर के अभाज्य गुणनखंड \(2^n \cdot 5^m\) के रूप के हों)।
- 2. अशांत आवर्ती दशमलव (Non-terminating Recurring): भाग देने पर शेषफल कभी शून्य नहीं होता और अंकों का एक समूह बार-बार पुनरावृत्त होता है। उदाहरण: \(\frac{1}{3} = 0.333\dots = 0.\bar{3}\), \(\frac{1}{7} = 0.\overline{142857}\)।
- 3. अशांत अनावर्ती दशमलव (Non-terminating Non-recurring): भाग देने पर न तो शेषफल शून्य होता है और न ही अंकों का कोई निश्चित पैटर्न पुनरावृत्त होता है। उदाहरण: \(\sqrt{2} = 1.41421356\dots\), \(\pi = 3.14159265\dots\)। यह केवल अपरिमेय संख्याओं का लक्षण है।
1.8 अशांत आवर्ती दशमलव को \(\frac{p}{q}\) रूप में बदलना
चरणबद्ध विधि:
- दी गई संख्या को \(x\) के बराबर मानें: जैसे \(x = 0.\bar{6} = 0.666\dots\)
- जितने अंकों पर बार (\(\bar{\quad}\)) हो, उतने 10 की घात (10, 100, 1000) से दोनों पक्षों में गुणा करें। (जैसे 1 अंक आवर्ती होने पर 10 से गुणा): \(10x = 6.666\dots\)
- प्रथम समीकरण को द्वितीय समीकरण से घटाएं: \(10x - x = 6.666\dots - 0.666\dots \implies 9x = 6\)
- \(x\) का मान ज्ञात करें: \(x = \frac{6}{9} = \frac{2}{3}\)
1.9 संख्या रेखा पर वास्तविक संख्याओं का निरूपण
प्रत्येक वास्तविक संख्या (चाहे वह पूर्णांक हो, भिन्न हो, शांत दशमलव हो या अपरिमेय संख्या हो) संख्या रेखा पर एक विशिष्ट बिंदु से निरूपित होती है। मूल बिंदु \(O(0)\) के दाईं ओर धनात्मक संख्याएँ तथा बाईं ओर ऋणात्मक संख्याएँ होती हैं।
1.10 उत्तरोत्तर आवर्धन प्रक्रम (Process of Successive Magnification)
उत्तरोत्तर आवर्धन शीशे (Magnifying Glass) की सहायता से संख्या रेखा पर किसी उत्तरोत्तर दशमलव प्रसार वाली संख्या (जैसे \(3.765\)) की स्थिति देखना:
- 3 और 4 के बीच के भाग को 10 बराबर भागों में बाँटें (जैसे \(3.7\) और \(3.8\))।
- पुनः \(3.7\) और \(3.8\) के बीच के भाग को 10 बराबर भागों में आवर्धित करें (\(3.76\) और \(3.77\))।
- अंत में \(3.76\) और \(3.77\) के बीच के भाग को 10 भागों में विभाजित कर सटीक बिंदु \(3.765\) प्राप्त करें।
1.11 अपरिमेय संख्याओं (\(\sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{5}\)) का संख्या रेखा पर आलेखन
पाइथागोरस प्रमेय का अनुप्रयोग:
\(\sqrt{n}\) का स्थान निर्धारण करने के लिए पहले \(\sqrt{n-1}\) का निर्माण किया जाता है।
- \(\sqrt{2}\) के लिए: संख्या रेखा पर इकाई लंबाई \(OA = 1\) लें। बिंदु \(A\) पर लंब \(AB = 1\) खींचें। पाइथागोरस प्रमेय से कर्ण \(OB = \sqrt{1^2 + 1^2} = \sqrt{2}\)। \(O\) को केंद्र मानकर \(OB\) त्रिज्या का चाप संख्या रेखा पर काटें।
- \(\sqrt{3}\) के लिए: \(OB\) पर लंब \(BC = 1\) बनाएँ, तो कर्ण \(OC = \sqrt{(\sqrt{2})^2 + 1^2} = \sqrt{3}\)।
1.12 वास्तविक संख्याओं पर बीजगणितीय संक्रियाएँ
- एक परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का योग या अंतर अपरिमेय होता है। (उदा: \(3 + \sqrt{2}\))
- एक शून्यतर (non-zero) परिमेय संख्या और एक अपरिमेय संख्या का गुणनफल या भागफल अपरिमेय होता है। (उदा: \(2\sqrt{3}\))
- दो अपरिमेय संख्याओं का योग, अंतर, गुणनफल या भागफल परिमेय अथवा अपरिमेय कुछ भी हो सकता है। (उदा: \(\sqrt{2} + (-\sqrt{2}) = 0\) जो परिमेय है)।
1.13 हर का परिमेयकरण (Rationalization of Denominator)
किसी व्यंजक के हर से अपरिमेय पद (करणी) को हटाने की प्रक्रिया को परिमेयकरण कहते हैं।
$$\begin{aligned} \frac{1}{\sqrt{a}} &= \frac{1}{\sqrt{a}} \times \frac{\sqrt{a}}{\sqrt{a}} = \frac{\sqrt{a}}{a} \\ \frac{1}{\sqrt{a} + \sqrt{b}} &= \frac{1}{\sqrt{a} + \sqrt{b}} \times \frac{\sqrt{a} - \sqrt{b}}{\sqrt{a} - \sqrt{b}} = \frac{\sqrt{a} - \sqrt{b}}{a - b} \\ \frac{1}{a + b\sqrt{c}} &= \frac{1}{a + b\sqrt{c}} \times \frac{a - b\sqrt{c}}{a - b\sqrt{c}} = \frac{a - b\sqrt{c}}{a^2 - b^2 c} \end{aligned}$$1.14 वास्तविक घातांक के नियम (Laws of Exponents)
धनात्मक वास्तविक संख्याओं \(a, b > 0\) तथा परिमेय घातांकों \(m, n\) के लिए:
$$\begin{aligned} a^m \cdot a^n &= a^{m+n} \\ (a^m)^n &= a^{m \cdot n} \\ \frac{a^m}{a^n} &= a^{m-n} \quad (a \neq 0) \\ a^m \cdot b^m &= (a \cdot b)^m \\ \left(\frac{a}{b}\right)^m &= \frac{a^m}{b^m} \\ a^0 &= 1 \quad (a \neq 0) \\ a^{-n} &= \frac{1}{a^n}, \quad a^{1/n} = \sqrt[n]{a} \end{aligned}$$1.15 करणी एवं उनके गुणधर्म (Radicals and Surds)
यदि \(a > 0\) एक धनात्मक परिमेय संख्या हो और \(\sqrt[n]{a}\) परिमेय न हो, तो इसे \(n\) घात की करणी (Surd) कहते हैं। सर्वसमिकाएँ:
$$\begin{aligned} \sqrt{ab} &= \sqrt{a} \cdot \sqrt{b} \\ \sqrt{\frac{a}{b}} &= \frac{\sqrt{a}}{\sqrt{b}} \\ (\sqrt{a} + \sqrt{b})(\sqrt{a} - \sqrt{b}) &= a - b \\ (a + \sqrt{b})(a - \sqrt{b}) &= a^2 - b \\ (\sqrt{a} + \sqrt{b})^2 &= a + 2\sqrt{ab} + b \end{aligned}$$1.16 परिमेय संख्याओं की सघनता (Density Property)
नियम: किन्हीं भी दो दी गई परिमेय संख्याओं \(a\) और \(b\) (\(a < b\)) के बीच अपरिमित रूप से अनेक (Infinitely many) परिमेय तथा अपरिमेय संख्याएँ स्थित होती हैं।
- दो संख्याओं \(a\) व \(b\) के ठीक बीच की परिमेय संख्या \(= \frac{a + b}{2}\)।
- \(a\) व \(b\) के बीच \(n\) परिमेय संख्याएँ ज्ञात करने के लिए: हर को \((n+1)\) से गुणा करके तुल्य भिन्न बनाएँ।
- \(a\) व \(b\) के बीच अपरिमेय संख्या: जैसे \(\sqrt{ab}\) (यदि \(ab\) पूर्ण वर्ग न हो)।
हल किया गया उदाहरण 1.1: \(\frac{1}{7+3\sqrt{2}}\) के हर का परिमेयकरण
प्रश्न: व्यंजक \(\frac{1}{7+3\sqrt{2}}\) के हर का परिमेयकरण (Rationalize the denominator) कीजिए।
हल: अंश तथा हर में \((7-3\sqrt{2})\) से गुणा करने पर:
$$\frac{1}{7+3\sqrt{2}} \times \frac{7-3\sqrt{2}}{7-3\sqrt{2}} = \frac{7-3\sqrt{2}}{7^2 - (3\sqrt{2})^2} = \frac{7-3\sqrt{2}}{49 - 18} = \frac{7-3\sqrt{2}}{31}$$2. बहुपद एवं सर्वसमिकाएँ (Polynomials & Algebraic Identities)
चरों (variables) तथा अचरों (constants) के धनात्मक पूर्ण संख्या घातांक वाले बीजीय व्यंजक को बहुपद (Polynomial) कहते हैं। नीचे इस अध्याय के संपूर्ण नियम व सूत्र दिए गए हैं:
2.1 एक चर में बहुपद का मानक रूप
\(P(x) = a_n x^n + a_{n-1} x^{n-1} + \dots + a_1 x + a_0\)
जहाँ \(a_n, a_{n-1}, \dots, a_0\) वास्तविक संख्याएँ हैं (\(a_n \neq 0\)) तथा घातांक \(n\) एक ऋणेतर पूर्णांक (non-negative integer) यानी पूर्ण संख्या \(\{0, 1, 2, 3, \dots\}\) है।
2.2 बहुपद की घात (Degree of Polynomial)
किसी बहुपद में चर \(x\) की उच्चतम घात को बहुपद की घात (Degree) कहते हैं।
- अचर बहुपद (Constant Polynomial): घात = 0 (उदा: \(P(x) = 5 = 5x^0\))
- शून्य बहुपद (Zero Polynomial): \(P(x) = 0\) (इसकी घात अपरिभाषित / Undefined होती है)
- रैखिक बहुपद (Linear Polynomial): घात = 1 (उदा: \(ax + b, a \neq 0\))
- द्विघात बहुपद (Quadratic Polynomial): घात = 2 (उदा: \(ax^2 + bx + c, a \neq 0\))
- त्रिघात बहुपद (Cubic Polynomial): घात = 3 (उदा: \(ax^3 + bx^2 + cx + d, a \neq 0\))
- चतुर्घात बहुपद (Biquadratic Polynomial): घात = 4
2.3 पदों के आधार पर वर्गीकरण
- एकपदी (Monomial): केवल 1 पद होता है (उदा: \(2x, -5x^2\))
- द्विपदी (Binomial): 2 पद होते हैं (उदा: \(x + 1, 3x^2 - 4\))
- त्रिपदी (Trinomial): 3 पद होते हैं (उदा: \(x^2 + 2x + 5\))
2.4 बहुपद के शून्यक (Zeroes of a Polynomial)
वास्तविक संख्या \(k\) बहुपद \(P(x)\) का शून्यक कहलाती है यदि \(P(k) = 0\) हो।
एक \(n\)-घात वाले बहुपद के अधिकतम \(n\) वास्तविक शून्यक हो सकते हैं। (जैसे रैखिक का 1, द्विघात के अधिकतम 2, त्रिघात के 3)।
2.5 शेषफल प्रमेय (Remainder Theorem)
यदि \(P(x)\) एक या एक से अधिक घात वाला बहुपद हो और उसे एक रैखिक बहुपद \((x - a)\) से भाग दिया जाए, तो शेषफल \(R = P(a)\) प्राप्त होता है।
2.6 गुणनखंड प्रमेय (Factor Theorem)
बहुपद \(P(x)\) के लिए रैखिक पद \((x - a)\) एक गुणनखंड होगा यदि और केवल यदि \(P(a) = 0\) हो।
2.7 संपूर्ण 10 बीजीय सर्वसमिकाएँ (Algebraic Identities)
$$\begin{aligned} 1. \quad (a + b)^2 &= a^2 + 2ab + b^2 \\ 2. \quad (a - b)^2 &= a^2 - 2ab + b^2 \\ 3. \quad a^2 - b^2 &= (a - b)(a + b) \\ 4. \quad (x + a)(x + b) &= x^2 + (a + b)x + ab \\ 5. \quad (a + b + c)^2 &= a^2 + b^2 + c^2 + 2ab + 2bc + 2ca \\ 6. \quad (a + b)^3 &= a^3 + b^3 + 3ab(a + b) = a^3 + 3a^2b + 3ab^2 + b^3 \\ 7. \quad (a - b)^3 &= a^3 - b^3 - 3ab(a - b) = a^3 - 3a^2b + 3ab^2 - b^3 \\ 8. \quad a^3 + b^3 &= (a + b)(a^2 - ab + b^2) \\ 9. \quad a^3 - b^3 &= (a - b)(a^2 + ab + b^2) \\ 10. \quad a^3 + b^3 + c^3 - 3abc &= (a + b + c)(a^2 + b^2 + c^2 - ab - bc - ca) \end{aligned}$$विशेष नियम: यदि \(a + b + c = 0\) हो, तो \(a^3 + b^3 + c^3 = 3abc\) होता है।
हल किया गया उदाहरण 2.1: सर्वसमिका द्वारा गुणनखंडन
प्रश्न: सर्वसमिका का प्रयोग करके \(8x^3 + 27y^3 + z^3 - 18xyz\) का गुणनखंड कीजिए।
हल: व्यंजक को \((2x)^3 + (3y)^3 + z^3 - 3(2x)(3y)(z)\) के रूप में लिखें।
सर्वसमिका 10 का प्रयोग करने पर:
$$= (2x + 3y + z)[(2x)^2 + (3y)^2 + z^2 - (2x)(3y) - (3y)(z) - (z)(2x)]$$ $$= (2x + 3y + z)(4x^2 + 9y^2 + z^2 - 6xy - 3yz - 2zx)$$3. निर्देशांक ज्यामिति (Coordinate Geometry)
निर्देशांक ज्यामिति गणित की वह शाखा है जिसमें बीजगणित की सहायता से ज्यामिति का अध्ययन किया जाता है। इसकी खोज फ्रांसीसी गणितज्ञ रेने देकार्ते (René Descartes) ने की थी।
एनिमेटेड कार्तीय तल: 4 चतुर्थांश एवं बिंदु P(x, y)
3.1 अक्ष एवं मूल बिंदु (Axes and Origin)
X-अक्ष: समतल में क्षैतिज रेखा (Horizontal Line) को X-अक्ष कहते हैं।
Y-अक्ष: समतल में ऊर्ध्वाधर रेखा (Vertical Line) को Y-अक्ष कहते हैं।
मूल बिंदु (Origin): दोनों अक्षों के प्रतिच्छेद बिंदु को मूल बिंदु कहते हैं, जिसके निर्देशांक \(O(0,0)\) होते हैं।
3.2 भुज एवं कोटि (Abscissa and Ordinate)
किसी बिंदु \(P(x, y)\) के लिए:
- भुज (Abscissa / x-निर्देशांक): बिंदु की Y-अक्ष से लंबवत दूरी।
- कोटि (Ordinate / y-निर्देशांक): बिंदु की X-अक्ष से लंबवत दूरी।
- अक्षों पर स्थित बिंदु: X-अक्ष पर स्थित किसी बिंदु की कोटि 0 होती है, अर्थात् निर्देशांक \((x, 0)\)। Y-अक्ष पर स्थित बिंदु का भुज 0 होता है, अर्थात् निर्देशांक \((0, y)\)।
3.3 चतुर्थांश के चिन्ह (Quadrant Signs)
$$\begin{aligned} \text{प्रथम चतुर्थांश (I):} &\quad (+, +) \quad (x > 0, y > 0) \\ \text{द्वितीय चतुर्थांश (II):} &\quad (-, +) \quad (x < 0, y> 0) \\ \text{तृतीय चतुर्थांश (III):} &\quad (-, -) \quad (x < 0, y < 0) \\ \text{चतुर्थ चतुर्थांश (IV):} &\quad (+, -) \quad (x> 0, y < 0) \end{aligned}$$3.4 दूरी सूत्र एवं मध्य बिंदु सूत्र (Distance & Midpoint Formula)
दो बिंदुओं \(A(x_1, y_1)\) और \(B(x_2, y_2)\) के बीच की दूरी:
$$d = \sqrt{(x_2 - x_1)^2 + (y_2 - y_1)^2}$$मूल बिंदु \(O(0,0)\) से बिंदु \(P(x,y)\) की दूरी: \(OP = \sqrt{x^2 + y^2}\)
रेखाखंड \(AB\) के मध्य बिंदु के निर्देशांक: \(\left( \frac{x_1 + x_2}{2}, \frac{y_1 + y_2}{2} \right)\)
4. दो चरों वाले रैखिक समीकरण (Linear Equations in Two Variables)
जिस समीकरण को \(ax + by + c = 0\) के रूप में रखा जा सकता है, जहाँ \(a, b, c\) वास्तविक संख्याएँ हैं तथा \(a\) और \(b\) दोनों शून्य नहीं हैं (\(a^2 + b^2 \neq 0\)), उसे दो चरों वाला रैखिक समीकरण कहते हैं।
4.1 रैखिक समीकरण के हल (Solutions)
मानक रूप: \(ax + by + c = 0\)
हल की संख्या: दो चरों वाले एक रैखिक समीकरण के अपरिमित रूप से अनेक (Infinitely Many) हल होते हैं।
प्रत्येक हल \((x, y)\) समीकरण को संतुष्ट करने वाला एक क्रमित युग्म (ordered pair) होता है जो इसके आलेख (Graph) पर स्थित एक बिंदु को निरूपित करता है।
4.2 समीकरण का आलेख (Graph of Linear Equation)
दो चरों वाले रैखिक समीकरण का आलेख सदैव एक सरल रेखा (Straight Line) होता है।
- मूल बिंदु से होकर जाने वाली रेखा का समीकरण: \(y = mx\) (जहाँ \(c = 0\))
- X-अक्ष का समीकरण: \(y = 0\)
- Y-अक्ष का समीकरण: \(x = 0\)
4.3 अक्षों के समांतर रेखाओं के समीकरण
$$\begin{aligned} x = a \quad &\longrightarrow \text{ Y-अक्ष के समांतर रेखा (दूरी } a \text{)} \\ y = b \quad &\longrightarrow \text{ X-अक्ष के समांतर रेखा (दूरी } b \text{)} \end{aligned}$$4.4 ढाल (प्रवणता) एवं अंतःखंड रूप
$$y = mx + c$$जहाँ \(m = -\frac{a}{b}\) रेखा की प्रवणता (Slope) है तथा \(c = -\frac{c}{b}\) Y-अक्ष पर काटा गया अंतःखंड है।
5. यूक्लिड की ज्यामिति का परिचय एवं रेखाएँ और कोण (Lines & Angles)
ग्रीक गणितज्ञ यूक्लिड (Euclid) को ज्यामिति का पिता माना जाता है। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'The Elements' में ज्यामिति को नियमबद्ध किया।
5.1 यूक्लिड की 5 अवधारणाएँ (Postulates)
- एक बिंदु से एक अन्य बिंदु तक एक सीधी रेखा खींची जा सकती है।
- एक शांत रेखा (Terminated Line) को अनिश्चित रूप से बढ़ाया जा सकता है।
- किसी केंद्र और किसी त्रिज्या से एक वृत्त खींचा जा सकता है।
- सभी समकोण एक-दूसरे के बराबर होते हैं।
- यदि एक सीधी रेखा दो सीधी रेखाओं पर गिरकर अपने एक ही ओर दो अंतःकोण इस प्रकार बनाए कि इन दोनों कोणों का योग मिलकर दो समकोण (\(180^\circ\)) से कम हो, तो वे दोनों सीधी रेखाएँ अनिश्चित रूप से बढ़ाए जाने पर उसी ओर मिलती हैं जिस ओर यह योग \(180^\circ\) से कम होता है।
5.2 कोणों के प्रकार (Types of Angles)
- न्यूनकोण (Acute Angle): \(0^\circ < \theta < 90^\circ\)
- समकोण (Right Angle): \(\theta = 90^\circ\)
- अधिककोण (Obtuse Angle): \(90^\circ < \theta < 180^\circ\)
- ऋजुकोण / सरल कोण (Straight Angle): \(\theta = 180^\circ\)
- प्रतिवर्ती कोण (Reflex Angle): \(180^\circ < \theta < 360^\circ\)
- संपूर्ण कोण (Complete Angle): \(\theta = 360^\circ\)
5.3 कोण युग्म एवं नियम (Angle Pairs)
- पूरक कोण (Complementary Angles): दो कोणों का योग \(= 90^\circ\) (उदा: \(30^\circ\) और \(60^\circ\))
- संपूरक कोण (Supplementary Angles): दो कोणों का योग \(= 180^\circ\) (उदा: \(110^\circ\) और \(70^\circ\))
- रैखिक युग्म अभिगृहीत (Linear Pair Axiom): यदि एक किरण एक रेखा पर आधारित हो, तो इस प्रकार बने दोनों आसन्न कोणों का योग \(180^\circ\) होता है। (\(\angle 1 + \angle 2 = 180^\circ\))
- शीर्षाभिमुख कोण (Vertically Opposite Angles): दो रेखाओं के प्रतिच्छेद करने पर आमने-सामने के कोण बराबर होते हैं। (\(\angle 1 = \angle 3, \angle 2 = \angle 4\))
5.4 तिर्यक रेखा एवं समांतर रेखाएँ (Transversal & Parallel Lines)
जब एक तिर्यक रेखा (Transversal) दो समांतर रेखाओं \(l \parallel m\) को काटती है:
- संगत कोण (Corresponding Angles): आपस में बराबर होते हैं (\(\angle 1 = \angle 5, \angle 2 = \angle 6\dots\))
- एकांतर अंतःकोण (Alternate Interior Angles): आपस में बराबर होते हैं (\(\angle 3 = \angle 5, \angle 4 = \angle 6\))
- क्रमागत अंतःकोण (Co-interior Angles): इनका योग संपूरक (\(180^\circ\)) होता है (\(\angle 3 + \angle 6 = 180^\circ, \angle 4 + \angle 5 = 180^\circ\))
5.5 त्रिभुज का कोण योग गुणधर्म (Angle Sum Property)
1. किसी भी त्रिभुज के तीनों आंतरिक कोणों का योग सदैव \(180^\circ\) होता है:
$$\angle A + \angle B + \angle C = 180^\circ$$2. बहिष्कोण प्रमेय (Exterior Angle Theorem): त्रिभुज के किसी एक भुज को बढ़ाने पर बना बाह्य कोण, दो सम्मुख आंतरिक कोणों के योग के बराबर होता है:
$$\angle \text{ext} = \angle A + \angle B$$6. त्रिभुज एवं सर्वांगसमता (Triangles & Congruence)
दो आकृतियाँ जिनके रूप (Shape) और आकार (Size) समान हों, सर्वांगसम (Congruent) कहलाती हैं। यदि दो त्रिभुज \(\Delta ABC \cong \Delta PQR\) सर्वांगसम हों, तो उनके संगत भाग बराबर होते हैं जिसे সংक्षेप में CPCT (Corresponding Parts of Congruent Triangles) कहते हैं।
6.1 सर्वांगसमता की 5 कसौटियाँ (Criteria for Congruence)
- SAS (भुजा-कोण-भुजा / Side-Angle-Side): दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण बराबर हों।
- ASA (कोण-भुजा-कोण / Angle-Side-Angle): दो कोण और उनके अंतर्गत आने वाली भुजा बराबर हो।
- AAS (कोण-कोण-भुजा / Angle-Angle-Side): दो कोण और कोई एक संगत भुजा बराबर हो।
- SSS (भुजा-भुजा-भुजा / Side-Side-Side): तीनों संगत भुजाएँ आपस में बराबर हों।
- RHS (समकोण-कर्ण-भुजा / Right angle-Hypotenuse-Side): समकोण त्रिभुजों में कर्ण तथा एक भुजा बराबर हो।
6.2 त्रिभुज के गुणधर्म (Properties of Triangles)
- समद्विबाहु त्रिभुज प्रमेय: बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं। (यदि \(AB = AC\), तो \(\angle B = \angle C\))
- प्रमेय का विलोम: बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं। (यदि \(\angle B = \angle C\), तो \(AB = AC\))
6.3 त्रिभुज में असमानताएँ (Inequalities in a Triangle)
- त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से सदैव बड़ा होता है: \(a + b > c\)
- किसी त्रिभुज में बड़े कोण की सम्मुख भुजा बड़ी होती है।
- बड़ी भुजा का सम्मुख कोण बड़ा होता है।
7. त्रिकोणमिति (Trigonometry) — सारणी एवं सर्वसमिकाएँ
त्रिकोणमिति गणित की वह शाखा है जो समकोण त्रिभुज की भुजाओं और कोणों के बीच संबंधों का अध्ययन करती है।
7.1 समकोण त्रिभुज में 6 त्रिकोणमितीय अनुपात
समकोण त्रिभुज के कोण \(\theta\) के लिए (लंब = \(P\), आधार = \(B\), कर्ण = \(H\)):
$$\begin{aligned} \sin\theta &= \frac{\text{लंब}}{\text{कर्ण}} = \frac{P}{H}, &\quad \csc\theta &= \frac{\text{कर्ण}}{\text{लंब}} = \frac{H}{P} \\[0.5em] \cos\theta &= \frac{\text{आधार}}{\text{कर्ण}} = \frac{B}{H}, &\quad \sec\theta &= \frac{\text{कर्ण}}{\text{आधार}} = \frac{H}{B} \\[0.5em] \tan\theta &= \frac{\text{लंब}}{\text{आधार}} = \frac{P}{B}, &\quad \cot\theta &= \frac{\text{आधार}}{\text{लंब}} = \frac{B}{P} \end{aligned}$$7.2 व्युत्क्रम एवं भागफल संबंध
$$\begin{aligned} \csc\theta &= \frac{1}{\sin\theta}, &\quad \sec\theta &= \frac{1}{\cos\theta}, &\quad \cot\theta &= \frac{1}{\tan\theta} \\[0.5em] \tan\theta &= \frac{\sin\theta}{\cos\theta}, &\quad \cot\theta &= \frac{\cos\theta}{\sin\theta} \end{aligned}$$7.3 मूलभूत त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ
$$\begin{aligned} 1. \quad &\sin^2\theta + \cos^2\theta = 1 \implies \sin^2\theta = 1 - \cos^2\theta, \quad \cos^2\theta = 1 - \sin^2\theta \\[0.5em] 2. \quad &1 + \tan^2\theta = \sec^2\theta \implies \sec^2\theta - \tan^2\theta = 1, \quad \tan^2\theta = \sec^2\theta - 1 \\[0.5em] 3. \quad &1 + \cot^2\theta = \csc^2\theta \implies \csc^2\theta - \cot^2\theta = 1, \quad \cot^2\theta = \csc^2\theta - 1 \end{aligned}$$7.4 विशिष्ट कोणों की संपूर्ण त्रिकोणमितीय सारणी
| अनुपात \(\theta\) | \(0^\circ\)(0 rad) | \(30^\circ\)(\(\frac{\pi}{6}\)) | \(45^\circ\)(\(\frac{\pi}{4}\)) | \(60^\circ\)(\(\frac{\pi}{3}\)) | \(90^\circ\)(\(\frac{\pi}{2}\)) |
|---|---|---|---|---|---|
| \(\sin\theta\) | \(0\) | \(\frac{1}{2}\) | \(\frac{1}{\sqrt{2}}\) | \(\frac{\sqrt{3}}{2}\) | \(1\) |
| \(\cos\theta\) | \(1\) | \(\frac{\sqrt{3}}{2}\) | \(\frac{1}{\sqrt{2}}\) | \(\frac{1}{2}\) | \(0\) |
| \(\tan\theta\) | \(0\) | \(\frac{1}{\sqrt{3}}\) | \(1\) | \(\sqrt{3}\) | अपरिभाषित (\(\infty\)) |
| \(\cot\theta\) | अपरिभाषित (\(\infty\)) | \(\sqrt{3}\) | \(1\) | \(\frac{1}{\sqrt{3}}\) | \(0\) |
| \(\sec\theta\) | \(1\) | \(\frac{2}{\sqrt{3}}\) | \(\sqrt{2}\) | \(2\) | अपरिभाषित (\(\infty\)) |
| \(\csc\theta\) | अपरिभाषित (\(\infty\)) | \(2\) | \(\sqrt{2}\) | \(\frac{2}{\sqrt{3}}\) | \(1\) |
7.5 पूरक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात
$$\begin{aligned} \sin(90^\circ - \theta) &= \cos\theta, &\quad \cos(90^\circ - \theta) &= \sin\theta \\[0.5em] \tan(90^\circ - \theta) &= \cot\theta, &\quad \cot(90^\circ - \theta) &= \tan\theta \\[0.5em] \sec(90^\circ - \theta) &= \csc\theta, &\quad \csc(90^\circ - \theta) &= \sec\theta \end{aligned}$$8. चतुर्भुज एवं वृत्त (Quadrilaterals & Circles)
यह अध्याय समतल ज्यामिति के दो प्रमुख स्तंभों — चार भुजाओं वाली बंद आकृति (चतुर्भुज) तथा निश्चित बिंदु से समान दूरी पर स्थित बिंदुओं के बिंदुपथ (वृत्त) के सिद्धांतों को स्पष्ट करता है।
8.1 चतुर्भुज का कोण योग गुणधर्म
किसी चतुर्भुज के चारों आंतरिक कोणों का योग सदैव \(360^\circ\) होता है:
$$\angle A + \angle B + \angle C + \angle D = 360^\circ$$8.2 समानांतर चतुर्भुज के गुणधर्म (Parallelogram)
- सम्मुख भुजाएँ बराबर और समांतर होती हैं (\(AB \parallel CD, AB = CD\))।
- सम्मुख कोण बराबर होते हैं (\(\angle A = \angle C, \angle B = \angle D\))।
- विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित (bisect) करते हैं।
- विशेष चतुर्भुज: आयत (प्रत्येक कोण \(90^\circ\)), समचतुर्भुज (चारों भुजाएँ बराबर, विकर्ण \(90^\circ\) पर समद्विभाजित), वर्ग (आयत + समचतुर्भुज)।
8.3 मध्य-बिंदु प्रमेय (Mid-point Theorem)
प्रमेय: किसी त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं के मध्य-बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड तीसरी भुजा के समांतर होता है तथा उसका आधा होता है।
$$DE \parallel BC \quad \text{तथा} \quad DE = \frac{1}{2} BC$$8.4 वृत्त के प्रमुख प्रमेय (Circle Theorems)
- जीवा पर लंब: वृत्त के केंद्र से किसी जीवा पर डाला गया लंब जीवा को समद्विभाजित करता है।
- समान जीवाएँ: वृत्त की समान जीवाएँ केंद्र पर समान कोण अंतरित करती हैं तथा केंद्र से समान दूरी पर होती हैं।
- केंद्र पर बना कोण: किसी चाप द्वारा केंद्र पर अंतरित कोण, उसी चाप द्वारा वृत्त के शेष भाग पर अंतरित कोण का दुगुना होता है। (\(\angle AOB = 2 \angle ACB\))
- एक ही वृत्तखंड के कोण: एक ही वृत्तखंड (Segment) में बने कोण आपस में बराबर होते हैं।
- अर्धवृत्त का कोण: अर्धवृत्त में बना कोण समकोण (\(90^\circ\)) होता है।
8.5 चक्रीय चतुर्भुज (Cyclic Quadrilateral)
जिस चतुर्भुज के चारों शीर्ष एक वृत्त पर स्थित हों, उसे चक्रीय चतुर्भुज कहते हैं।
नियम: चक्रीय चतुर्भुज के सम्मुख कोणों के प्रत्येक युग्म का योग \(180^\circ\) (संपूरक) होता है:
$$\angle A + \angle C = 180^\circ, \quad \angle B + \angle D = 180^\circ$$9. हीरोन का सूत्र एवं क्षेत्रमिति (Heron's Formula & Mensuration)
मिस्र के अलेक्जेंड्रिया के गणितज्ञ हीरोन (Heron) ने बिना ऊँचाई (Height) जाने केवल तीनों भुजाओं की लंबाई ज्ञात होने पर त्रिभुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने का प्रसिद्ध सूत्र दिया।
9.1 हीरोन का सूत्र (Heron's Formula)
यदि किसी त्रिभुज की तीनों भुजाएँ \(a, b, c\) हों:
1. अर्ध-परिमाप (Semi-perimeter, \(s\)):
$$s = \frac{a + b + c}{2}$$2. त्रिभुज का क्षेत्रफल (Area of Triangle):
$$\text{Area} = \sqrt{s(s - a)(s - b)(s - c)}$$9.2 विशेष त्रिभुजों के क्षेत्रफल सूत्र
$$\begin{aligned} \text{समकोण त्रिभुज:} &\quad \text{Area} = \frac{1}{2} \times \text{आधार} \times \text{ऊँचाई} \\[0.5em] \text{समबाहु त्रिभुज (भुजा } a\text{):} &\quad \text{Area} = \frac{\sqrt{3}}{4} a^2, \quad \text{ऊँचाई } h = \frac{\sqrt{3}}{2} a \\[0.5em] \text{समद्विबाहु त्रिभुज (भुजाएँ } a, a, b\text{):} &\quad \text{Area} = \frac{b}{4} \sqrt{4a^2 - b^2} \end{aligned}$$9.3 चतुर्भुजों के क्षेत्रफल में हीरोन सूत्र का अनुप्रयोग
किसी भी विषम चतुर्भुज का क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए उसे एक विकर्ण खींचकर दो त्रिभुजों में विभाजित किया जाता है, फिर दोनों त्रिभुजों पर अलग-अलग हीरोन सूत्र लगाकर योग प्राप्त किया जाता है:
$$\text{Area of Quad } ABCD = \text{Area}(\Delta ABC) + \text{Area}(\Delta ADC)$$10. पृष्ठ क्षेत्रफल और आयतन (Surface Area & Volume)
त्रिविमीय (3D) आकृतियों के वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल (CSA), कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल (TSA) तथा आयतन (Volume) के संपूर्ण सूत्रों का संग्रह:
10.1 घनाभ एवं घन (Cuboid & Cube)
1. घनाभ (Cuboid - लंबाई \(l\), चौड़ाई \(b\), ऊँचाई \(h\)):
$$\begin{aligned} \text{पार्व पृष्ठीय क्षेत्रफल (LSA / 4 दीवारों का क्षेत्रफल)} &= 2h(l + b) \\[0.5em] \text{कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल (TSA)} &= 2(lb + bh + hl) \\[0.5em] \text{आयतन (Volume)} &= l \cdot b \cdot h \\[0.5em] \text{विकर्ण की लंबाई (Diagonal)} &= \sqrt{l^2 + b^2 + h^2} \end{aligned}$$2. घन (Cube - भुजा \(a\)):
$$\begin{aligned} \text{पार्श्व पृष्ठीय क्षेत्रफल (LSA)} &= 4a^2 \\[0.5em] \text{कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल (TSA)} &= 6a^2 \\[0.5em] \text{आयतन (Volume)} &= a^3 \\[0.5em] \text{विकर्ण की लंबाई (Diagonal)} &= a\sqrt{3} \end{aligned}$$10.2 लंब वृत्तीय बेलन (Right Circular Cylinder - त्रिज्या \(r\), ऊँचाई \(h\))
$$\begin{aligned} \text{वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल (CSA)} &= 2\pi r h \\[0.5em] \text{कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल (TSA)} &= 2\pi r h + 2\pi r^2 = 2\pi r(r + h) \\[0.5em] \text{आयतन (Volume)} &= \pi r^2 h \end{aligned}$$10.3 लंब वृत्तीय शंकु (Right Circular Cone - त्रिज्या \(r\), ऊँचाई \(h\), तिर्यक ऊँचाई \(l\))
$$\begin{aligned} \text{तिर्यक ऊँचाई (Slant Height, } l\text{)} &= \sqrt{r^2 + h^2} \\[0.5em] \text{वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल (CSA)} &= \pi r l \\[0.5em] \text{कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल (TSA)} &= \pi r l + \pi r^2 = \pi r(l + r) \\[0.5em] \text{आयतन (Volume)} &= \frac{1}{3}\pi r^2 h \end{aligned}$$10.4 गोला एवं अर्धगोला (Sphere & Hemisphere - त्रिज्या \(r\))
1. गोला (Sphere):
$$\begin{aligned} \text{पृष्ठीय क्षेत्रफल (Surface Area)} &= 4\pi r^2 \\[0.5em] \text{आयतन (Volume)} &= \frac{4}{3}\pi r^3 \end{aligned}$$2. ठोस अर्धगोला (Solid Hemisphere):
$$\begin{aligned} \text{वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल (CSA)} &= 2\pi r^2 \\[0.5em] \text{कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल (TSA)} &= 3\pi r^2 \\[0.5em] \text{आयतन (Volume)} &= \frac{2}{3}\pi r^3 \end{aligned}$$11. सांख्यिकी एवं प्रायिकता (Statistics & Probability)
यह अध्याय आंकड़ों (Data) के संग्रह, सारणीकरण, आलेखी निरूपण (Graphical representation), केंद्रीय प्रवृत्ति के माप (Central Tendency) तथा अनिश्चितता की माप (प्रायिकता) के सिद्धांतों को समझाता है।
11.1 आंकड़ों का संग्रह एवं निरूपण
- प्राथमिक आंकड़े (Primary Data): अन्वेषक द्वारा स्वयं प्रत्यक्ष रूप से एकत्रित किए गए आंकड़े।
- द्वितीयक आंकड़े (Secondary Data): किसी पूर्व-एकत्रित स्रोत (समाचार पत्र, सरकारी रिपोर्ट) से प्राप्त आंकड़े।
- परिसर (Range): उच्चतम मान और न्यूनतम मान का अंतर (\(\text{Range} = \text{Max} - \text{Min}\))।
- वर्ग चिह्न (Class Mark): \(\frac{\text{उच्चतम सीमा} + \text{निम्नतम सीमा}}{2}\)
11.2 केंद्रीय प्रवृत्ति के माप (Measures of Central Tendency)
1. माध्य (Mean, \(\bar{x}\)):
$$\bar{x} = \frac{\sum x_i}{n} = \frac{\sum f_i x_i}{\sum f_i}$$2. माध्यक (Median): आंकड़ों को आरोही (Ascending) क्रम में व्यवस्थित करने पर:
$$\text{Median} = \begin{cases} \left(\frac{n+1}{2}\right)\text{वाँ पद} & \text{यदि } n \text{ विषम हो} \\[0.5em] \frac{\left(\frac{n}{2}\right)\text{वाँ पद} + \left(\frac{n}{2} + 1\right)\text{वाँ पद}}{2} & \text{यदि } n \text{ सम हो} \end{cases}$$3. बहुलक (Mode): वितरण में सर्वाधिक बारम्बारता वाला प्रेक्षण मान।
$$\text{बहुलक} \approx 3(\text{माध्यक}) - 2(\text{माध्य})$$11.3 प्रायिकता (Empirical / Experimental Probability)
किसी घटना \(E\) की प्रायिकता \(P(E)\):
$$P(E) = \frac{\text{घटना } E \text{ के घटित होने के अभिप्रयोगों की संख्या}}{\text{अभिप्रयोगों की कुल संख्या}}$$प्रायिकता के मौलिक नियम:
- किसी भी घटना की प्रायिकता सदैव 0 और 1 के बीच होती है: \(0 \le P(E) \le 1\)
- असंभव घटना (Impossible Event): \(P(E) = 0\) (उदा: पासा फेंकने पर 7 आना)
- निश्चित घटना (Sure Event): \(P(E) = 1\)
- पूरक घटना नियम: किसी घटना के होने \(P(E)\) तथा न होने \(P(\bar{E})\) की प्रायिकता का योग 1 होता है: $$P(E) + P(\bar{E}) = 1 \implies P(\bar{E}) = 1 - P(E)$$
Discussion & Reviews
Tap stars to rate this page:
Tyagi